राम, कृष्ण, गणेश, देवी और हनुमान की पाँच कहानियाँ। हर हिन्दी संस्करण उसी जाँची हुई मूल कहानी से जुड़ा है, अलग से पढ़कर सुनाया गया है, भाषा-संपादन से गुज़रा है और स्रोत से दोबारा मिलाया गया है। अभी 5 समीक्षित कहानियाँ उपलब्ध हैं; और कहानियाँ समीक्षा पूरी होने के बाद जोड़ी जाएँगी।
चौदह साल पूरे हो चुके थे। राम किस घड़ी लौटेंगे, यह किसी को नहीं पता था। इसलिए शहर ने इंतज़ार अँधेरे में नहीं किया।
वह पहाड़ जिसे सबने अपनी लाठियों से थामाBhāgavata Purāṇa · Skandha 10, chapters 24–25 · उम्र 5+सात साल के कृष्ण ने सात दिन तक पूरा पहाड़ छोटी उँगली पर उठा रखा। नीचे खड़े एक ग्वाले ने सोचा—बच्चा थक रहा होगा—और अपनी लाठी लगा दी।
गणेश ने दुनिया का चक्कर लगायाŚiva Purāṇa · Rudra Saṃhitā; also Skanda Purāṇa and the Tamil Vināyaka Purāṇam · उम्र 4+एक आम के लिए दो भाइयों की दुनिया-भर की दौड़ लगी। एक मोर पर निकल गया। दूसरा कमरे से बाहर ही नहीं गया।
महिषासुर, जिसे कोई अकेला नहीं हरा सकाDevī Māhātmya (Mārkaṇḍeya Purāṇa) · Chapters 2–3 · उम्र 8+कोई देवता उसे अकेले नहीं हरा सकता था। तब सबने अपनी-अपनी शक्ति का एक हिस्सा दिया—और उस मिली हुई रोशनी से कोई नई निकली।
जाम्बवान ने हनुमान को याद दिलायाVālmīki Rāmāyaṇa · Kiṣkindhākāṇḍa 4.63–66; Uttarakāṇḍa 7.36 for the curse tradition (Critical Edition) · उम्र 6+सब बता रहे थे कि वे कितनी दूर छलाँग लगा सकते हैं। हनुमान चुप थे। तब जाम्बवान उन्हें उन्हीं की कहानी सुनाने लगे।
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