Sandhya Kathaसंध्या कथा

फूल की गवाही

अग्नि का स्तंभ था, जिसका छोर किसी को नहीं मिला। फिर केतकी के फूल ने वह बात कही जो उसने देखी ही नहीं थी।

प्रकाशक Sandhya Katha · अद्यतन

समीक्षित हिन्दी संस्करण

इसे माता-पिता के पढ़कर सुनाने, हिन्दी भाषा-संपादन और मूल स्रोत से मिलान—तीनों के बाद मंज़ूर किया गया है। भाषा बदलने से कहानी की पहचान नहीं बदलती।

शिव पुराण · अध्याय 6–8

मूल स्रोत का मूल रूप

Śiva Purāṇa, Vidyeśvara Saṃhitā — chapters 6–8

परंपरा के बारे में. यह पाठ शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता के प्रसंग का अनुसरण करता है। यहाँ केतकी फूल स्तंभ के बीच से गिरने की बात कहता है; स्कंदपुराण के एक पाठ में फूल की कथा अलग है। ब्रह्मा का सिर कटने की दूसरी कथाओं को यहाँ नहीं मिलाया गया है।

शुरू करने से पहले. इस कथा में युद्ध के अस्त्र और बाद में उठी तलवार का प्रसंग है। तलवार का प्रहार नहीं होता। बच्चे को पहले बता दें कि भैरव को शिव रोक देते हैं।

3 मिनटउम्र 8+हिंसामूल कहानी v1
फूल की गवाही
समीक्षित चित्र · मूल कहानी v1

ब्रह्मा और विष्णु में इस बात पर झगड़ा हुआ कि दोनों में बड़ा कौन है। बात इतनी बढ़ी कि युद्ध छिड़ गया। दोनों ने ऐसे भयंकर अस्त्र छोड़े जिनकी आग से तीनों लोकों को संकट हो सकता था। देवता घबराकर शिव के पास पहुँचे।

शिव युद्धभूमि में आए। वहाँ अचानक आग का एक विराट स्तंभ प्रकट हुआ। दोनों अस्त्र उसमें समा गए। ब्रह्मा और विष्णु ऊपर देखते रहे, पर स्तंभ का शिखर दिखाई नहीं दिया। नीचे झाँका तो उसकी जड़ भी कहीं नहीं दिखी।

ठहराव

दोनों ने तय किया कि एक ऊपर जाएगा और दूसरा नीचे। विष्णु वराह का रूप लेकर धरती के नीचे उतरते चले गए। ब्रह्मा हंस बनकर आकाश की ओर उड़ चले। बहुत दूर जाने पर भी विष्णु को स्तंभ का तल नहीं मिला। थककर वे वापस लौट आए।

ऊपर उड़ते हुए ब्रह्मा को केतकी का एक फूल नीचे गिरता दिखाई दिया। फूल ने बताया कि वह स्तंभ के बीच से गिरा है और वर्षों से गिरता आ रहा है। उसे भी शिखर का पता नहीं था। फिर भी ब्रह्मा ने उससे कहा कि लौटकर विष्णु के सामने गवाही देना—मैं ऊपर तक पहुँच गया था।

ठहराव

विष्णु ने लौटकर साफ कहा कि उन्हें जड़ नहीं मिली। ब्रह्मा ने कहा कि उन्होंने शिखर देख लिया है। फूल ने उनकी बात दोहरा दी। विष्णु ने उस गवाही पर भरोसा किया और ब्रह्मा का सम्मान किया।

तभी शिव उसी अग्नि-स्तंभ से प्रकट हुए। उन्होंने विष्णु की सच्चाई की सराहना की। ब्रह्मा और फूल की बात झूठी थी; आग का कोई छोर उन्हें नहीं मिला था।

विष्णु ने ब्रह्मा के लिए क्षमा माँगी। शिव ने उन्हें बचा लिया, लेकिन कहा कि ब्रह्मा के अपने मंदिर और उत्सव नहीं होंगे। केतकी को भी उनकी पूजा में चढ़ाने से रोका गया; बाद में उसे मूर्ति के ऊपर सजाने की अनुमति मिली।

दोनों खाली हाथ लौटे थे। फर्क इतना था कि एक ने वैसा ही कहा, और दूसरे ने फूल से अपने लिए एक झूठी गवाही दिलवा दी।

अब बच्चे की ओर मुड़िए

अगर बहुत खोजने पर भी कोई उत्तर न मिले, तो सच कहने में सबसे मुश्किल क्या होगा?

और अगर वह कंधे उचका दे, तो इतना कहकर छोड़ सकते हैं: जो नहीं मिला, उसे मिल जाने का दावा न करना भी साहस है।

अगर बच्चा पूछे: “स्तंभ कहाँ से आया था?”

शिवपुराण के इस प्रसंग में शिव स्वयं अग्नि-स्तंभ के रूप में प्रकट हुए। दोनों भयंकर अस्त्र उसमें समा गए; फिर ब्रह्मा और विष्णु उसके छोर खोजने निकले।

अगर बच्चा पूछे: “क्या ब्रह्मा का सिर काट दिया गया?”

इस चुने हुए पाठ में नहीं। भैरव तलवार उठाते हैं, लेकिन विष्णु के अनुरोध पर शिव उन्हें रोक देते हैं। दूसरी कथाओं का अलग प्रसंग यहाँ नहीं जोड़ा गया है।

अगर बच्चा पूछे: “फूल ने झूठ क्यों बोला?”

पाठ उसके मन की पूरी बात नहीं बताता। इतना बताता है कि ब्रह्मा ने उससे झूठी गवाही माँगी और उसने वह बात दोहराई। इसलिए फूल को भी अपनी कही बात का परिणाम मिला।

यह वही स्रोत-जाँची कहानी है, अब समीक्षित हिन्दी में।

हर रात इन्हीं समीक्षित हिन्दी कहानियों में से उम्र और दिन के अनुसार एक कहानी चुनी जाती है।

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